सोशल एक्टिविस्ट अरविन्द कुमार पाण्डेय

अध्यक्ष, भारतीय हिंदू मित्र परिषद

जीवनी

मेरा नाम अरविन्द कुमार पाण्डेय है। मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के बाबा बेलखर नाथ धाम क्षेत्र के अंतर्गत एक छोटे से गाँव, महोखरी में हुआ। मेरी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा भी यहीं हुई और आगे चलकर मैंने स्नातक की उपाधि प्राप्त की। मेरे पिता, डॉ. हरिहर प्रसाद पाण्डेय, उत्तर रेलवे में स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मेरी माता एक आदर्श और सफल गृहणी हैं, जिन्होंने मुझे हमेशा नैतिक मूल्यों और सेवा-भाव से जीने की प्रेरणा दी। समाज सेवा का बीज मेरे मन में बचपन से ही बोया गया था, लेकिन मैंने इसे एक संगठित रूप देना वर्ष 1999 से शुरू किया। वर्ष 2007 में मैंने महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके सम्मान की रक्षा हेतु “इसराजी फाउंडेशन महिला टास्क फोर्स” नामक संगठन की स्थापना की। इस संगठन के माध्यम से मैंने घरेलू हिंसा, दहेज प्रताड़ना और मानवाधिकारों से वंचित महिलाओं की आवाज़ को बुलंद किया। मेरे नेतृत्व में 500 से अधिक पीड़ित महिलाओं को न्याय मिला, 17122 असहाय गरीबों को कंबल वितरित किए गए, 94 निर्धन लड़कियों की शादियाँ कराई गईं और 5 जरूरतमंद परिवारों को रहने के लिए घर बनवाकर दिए गए। यह सब आसान नहीं था — समय, धन और संगठन की शक्ति की आवश्यकता थी। मैंने अपनी निजी पूंजी और जनता द्वारा प्रदान की गई सहायता राशि को पूरी पारदर्शिता और निष्ठा के साथ उपयोग किया। मुझे भी सामाजिक और राजनीतिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ा, जैसा कि हर समाज सुधारक को करना पड़ता है — चाहे वह विवेकानंद हों, विद्यासागर हों या महात्मा गांधी जी। भ्रष्ट शासन और कुछ विश्वासघाती साथियों ने मेरे कार्यों को बाधित किया, लेकिन मैंने कभी हार नहीं मानी। पूरा पढ़ें

 

न्याय के लिए आवाज़

वीडियो

जनता के लिए पहल

मैंने 8 सितंबर 2020 को "भारतीय हिन्दू मित्र परिषद" नामक ट्रस्ट की स्थापना की, जो 11 सितंबर 2020 को विधिवत रूप से पंजीकृत हुआ। इस ट्रस्ट के माध्यम से मैंने अपने पैतृक गाँव महोखरी (प्रतापगढ़) में 15000 स्क्वायर फीट ज़मीन पर एक *सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल* के निर्माण की योजना शुरू की, जो आज निर्माणाधीन है। इस ट्रस्ट का उद्देश्य सिर्फ चिकित्सा सेवा नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, मानव अधिकारों की रक्षा, और एक बेहतर भारत का निर्माण है — ऐसा भारत, जहां हर व्यक्ति को न्याय मिले, और कोई भी वंचित न रहे।

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